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एक बयान से मचा हडकंप

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फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने ऐसा क्या कह दिया जो मच गया घमासान

जी हाँ राफेल विमान सौदे में शुरू से ही किसी न किसी तरह मोदी सरकार को विपक्ष के निशाने का सामना करना पड रहा है I अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का बयान बन गया मुसीबतI

अब इस मामले ने एक बार फिर से नया तूल पकड़ लिया है , दरअसल फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा कि अनिल अंबानी के रिलायंस का नाम उन्हें भारत सरकार ने सुझाया था, उनके पास और कोई विकल्प नहीं थाI

मोदी सरकार पर राफेल में घोटाले का आरोप लगा रही कांग्रेस को फ्रांस्वा ओलांदे के बयान ने मजबूती दी है और अब राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैंI

राहुल गाँधी व अन्य कांग्रेसी नेताओं सहित विपक्ष के कई नेताओं के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस , ट्वीट व सभाओं में खुलकर इसे पोल खोल करार दिया जा रहा है I

नवरत्न कंपनी के घाटे और निजी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए इसे बड़ा घोटाला करार दिया जा रहा हैI

प्रधानमंत्री की तरफ से पुरे मामले में अभी तक कोई बयान नहीं आया हैI

 

क्या है राफेल डील

वायुसेना की मांग के बाद 126 लड़ाकू विमान खरीदने का सबसे पहले प्रस्ताव अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने रखा था I लेकिन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया कांग्रेस सरकार ने I

तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी थे उन्होंने 126 एयरक्राफ्ट की खरीद को अगस्‍त 2007 में मंजूरी दी थीI

इस पर समझौता नहीं हो पाया, क्योंकि खासकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में दोनों पक्षों में गतिरोध बन गया I

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार बनी तो उसने इस दिशा में फिर से प्रयास शुरू किया I

साल 2015 में भारत और फ्रांस के बीच इस विमान की खरीद को लेकर समझौता किया गया समझौते में भारत ने जल्द से जल्द 36 राफेल तैयार विमान हासिल करने की बात कही I

लेकिन 36 विमानों के लिए हुए सौदे की लागत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गयाI सरकार का दावा है कि पहले भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की कोई बात नहीं थी I  सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी की लाइसेंस देने की बात थीI

सरकार ने दावा किया कि यह सौदा उसने यूपीए से ज्यादा बेहतर कीमत में किया है और करीब 12,600 करोड़ रुपये बचाए हैंI

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यूपीए 126 विमानों के लिए 54,000 करोड़ रुपये दे रही थी  जबकि मोदी सरकार सिर्फ 36 विमानों के लिए 58,000 करोड़ दे रही हैI

कांग्रेस का आरोप है कि एक प्लेन की कीमत 1555 करोड़ रुपये हैं, जबकि कांग्रेस 428 करोड़ में रुपये में खरीद रही थीI

 

यूपीए के सौदे में विमानों के भारत में एसेंबलिंग में  हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड (HAL) को शामिल करने की बात थी I भारत में यही एक कंपनी है जो सैन्य विमान बनाती हैI

लेकिन एनडीए के सौदे में एचएएल को बाहर कर इस काम को अम्बानी की रिलाइंस को सौंप दिया गया है I

यानी विपक्ष के मुताबिक एनडीए सरकार एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचा रही हैI

कांग्रेस का आरोप है कि सौदे से HAL को 25000 करोड़ रुपये का घाटा होगा I

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