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किसान आंदोलन की माँगें

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किसान आंदोलन से दिल्ली बेहाल , राहत

किसानों के आंदोलन के चलते पिछले दो दिनों तक जाम और रूट डायवर्जन की समस्या से दिल्ली-एनसीआर में आमजन भी परेशान दिखे , आखिर दो दिन बाद आंदोलन में शांति आई

आंदोलन के बाद किसानों की माँगो को मान लिया गया जिससे आन्दोलन की समाप्ति हुई हालांकि जितनी माँग किसान नेताओं ने रखीं उन सभी पर गौर नहीं किया जा सका है

इन माँगों को मान लिया गया है :-

कुल सात मांगें मान ली गई हैं

1. दस वर्ष से पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर एनजीटी की रोक के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। जिससे किसानों के पुराने वाहन की एंट्री दिल्ली में हो सके ।

2. मनरेगा को खेती से जोड़ने के लिए अब इसमें किसानों के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाएगा।

3. खेती में उपयोगी सामान पर 5 फीसदी जीएसटी करने के लिए को जीएसटी काउंसिल में प्रस्ताव रखा जाएगा।

4. उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी घोषित करने के निर्णय का रबी फसलों पर लागू । सरकार ने नई एमएसपी की घोषणा भी कर दी ।

5. जिन फसलों की पर्याप्त पैदावार होती है उनके आयात को रोकने के लिए कानून बनाने का भरोसा ।

6. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन के संबंध में एक समिति बनेगी। यह फसल बीमा योजना व किसान क्रेडिट कार्ड योजना में आ रही परेशानियों पर किसान संगठनों से बातचीत के बाद अपनी संस्तुति देगी।

7. जंगली व आवारा पशुओं द्वारा फसलों को हो रहे नुकसान की भरपाई अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत की जाएगी।

ये थीं किसान संगठनों की माँगे :-

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी को वैधानिक दर्जा देने और देश भर के किसानों की सभी फसलों और सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य स्वामीनाथन द्वारा सुझाए गए फार्मूले के अनुसार घोषित किया जाए।

2. किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किए जाएं।

3. एनजीटी द्वारा पुराने डीजल वाहनों जो 10 वर्ष से अधिक पुराने हैं के संचालन पर रोक लगा दी है। इसे हटाया जाए।

4. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है किसानों के हितों के अनुसार बदलाव किया जाए। प्रीमियम सरकार द्वारा दी जाए ।

5. किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए। लघु व सीमांत किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।

6. नीलगाय, जंगली सुअर व अन्य आवारा पशुओं के लिए एक नीति बनाई जाए,इनसे फसलों को हो रहे नुकसान की भरपाई हो ।

7. बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित बिना देरी किया जाए। चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपये प्रति किलो तय किया जाए।

8. किसानों को सिंचाई हेतु नलकूप की बिजली मुफ्त उपलब्ध कराई जाए।

9. आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार का पुनर्वास  और आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए। मनरेगा को खेती से जोड़ा जाए।

10. खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए।

11. देश में पर्याप्त मात्रा में पैदा होने वाली फसलों के आयात पर रोक लगे ।

12. भूमि अधिग्रहण को केंद्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोधी कानून बनाने से रोका जाए।
इनमें से आवारा पशुओं वाली समस्या आजकल शहरों की रोड़ों पर देखा जाना आम बात है । फसलों को बचाने के लिए किसान कटीले तारों का भी उपयोग करते हैं जो नाकाफी साबित हो रहे हैं ।

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