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कैसे और किसे मिलेगा सवर्ण गरीब आरक्षण

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कैसे और किसे मिल सकेगा सवर्ण गरीब 10% आरक्षण

ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर, राजपूत, जाट सहित कई जातियों व मुस्लिम और ईसाई भी होंगे शामिल ।

आरक्षण प्राप्त करने के लिए निम्न शर्तो को पूर्ण करना होगा

1.आरक्षण का लाभ लेने के लिए जाति प्रमाणपत्र और आय प्रमाण पत्र भी देना होगा।

2. सालाना 8 लाख आमदनी या 5 एकड़ से कम खेती वाले सामान्य वर्ग को भी आरक्षण सुविधा दी जाएगी ।

3. इसमें सामान्य हिन्दू सवर्ण के अलावा गरीब ईसाइयों और मुस्लिमों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा ।

4. आरक्षण का लाभ लेने के लिए नगर निकाय क्षेत्र में 1000 वर्ग फुट या इससे ज्यादा क्षेत्रफल का फ्लैट नहीं होना चाहिए और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में 200 यार्ड से ज्यादा का फ्लैट नहीं होना चाहिए ।

सामान्य गरीब आरक्षण बिल आज लोकसभा में पेश हुआ ।

सपा बसपा कॉंग्रेस सहित सभी पार्टियों ने समर्थन किया है ।

हालाँकि असदुद्दीन ओवैसी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का विरोध किया है।

चुनाव में होगा मोदी को फायदा

हालांकि गरीब सवर्णों को आरक्षण की बात काफी सालों से हो रही थी मगर लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले मोदी सरकार ने बड़ा चुनावी दांव चला है ।

एससी/एसटीए एक्ट में संंशोधन बिल लाकर अपने सवर्ण वोट बैंक की नाराजगी से 3 राज्य हार चुकी भाजपा के पास यही एक तरीका सवर्ण आकर्षण का था ।

इस बिल के विरोध में कोई भी मुख्य दल नहीं गया , कांग्रेस और मायावती भी इस बिल के समर्थन किया । सिर्फ ओवैसी ने ही इसे गलत करार दिया है ।

हालांकि गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण की खबर के बाद विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं ।

जो लोग शुरू से ही आरक्षण विरोधी हैं वो इसे साफ तौर पर एक लॉलीपॉप मान रहे हैं जो नोटा की वजह से दी गई है ।

भाजपा के अपने कुछ सवर्ण समर्थक लोग जो कल तक आरक्षण के खिलाफ थे वे पलटी मारने लगे और मोदी जी की तारीफ और प्रचार में जुट गए ।

शोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है भारत 100 फीसद आरक्षण की ओर से लेकर , वोट के लिए देश की प्रतिभाओं के साथ नाइंसाफी जैसी पोस्ट भी आ रही हैं ।

आइए जानें आरक्षण पर क्या है ख़बर :

केंद्रीय कैबिनेट ने आर्थिक आरक्षण के बिल को सोमवार को हुई बैठक में मंजूरी दे दी ।

इसके बाद मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया ।

कांग्रेस, सपा और बसपा सहित कई विपक्षी दलों ने इस बिल का समर्थन किया है ।

संसद का शीतकालीन सत्र आठ जनवरी को खत्म हो रहा था, लेकिन माना जा रहा है कि इस बिल के लिए राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन के लिए बढ़ा दी गई ।

सरकार ने ये क़दम बीजेपी से नाराज़ चल रहे सवर्णों के एक बड़े धड़े को लुभाने के लिए उठाया है ।

तीन राज्यों में ओबीसी और एससी-एसटी एक्ट पर उठाए गए कदमों से भाजपा को सवर्णों की नाराजगी का अंदाजा नहीं था ।

भाजपा को तीन राज्यों के नतीजों के बाद लगा कि सवर्णों को साथ लेकर चलना जरूरी है अतः अब ये 10% के आरक्षण की घोषणा सवर्णों को रिझाने के लिए है 2019 लोकसभा चुनाव निकट है