Home वेतन सेटलमेंट का कुछ हुआ क्या ?

वेतन सेटलमेंट का कुछ हुआ क्या ?

  • by

बैंक वेज रिवीजन

वेज रिवीजन मीटिंग के सर्कुलर के बाद बैंक स्टाफ की बातें , सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा मीटिंग या पार्टी का मैसेज , मैसेज में पार्टी मेनू भी दिया।

एक बैंक की सर्विस ब्रांच में क्लियरिंग को आए स्टाफ की बातों के मुख्य अंश

“अरे मिश्रा जी इस बार की सेटलमेंट मीटिंग में क्या क्या फाइनल हो गया क्या क्या बात हुई ?” कुमार ने प्रश्न किया

मिश्रा जी “पता नहीं कुमार साहब पिछली बार की मीटिंग के बाद जो सर्कुलर दिए थे बिल्कुल वैसा ही फिर से पेल दिए , बस एक बात जोड़ दी कि मेंडेट वाला ऑब्जेक्शन क्लियर हो गया है ।”

कुमार साहब “सही कह रहे हो मिश्रा जी पिछली कई मीटिंग से ऐसा लग रहा है जैसे अभी तो यूनियन अपनी डिमांड ही नहीं बता पाई । ”

ऋतु मैडम “शुरुआत में तो ऐसा लग रहा था जैसे इस बार का सेटलमेंट रिकॉर्ड टाइम में बहुत ही जल्दी निपटा लेंगे ”

कुमार साहब ” अरे कहाँ मैडम इनकी बातों में आते हो , जल्दी फाइनल होने से यूनियन को क्या फायदा ?”

सीमा मैडम ” सही कह रहे हो सर , जितना ज्यादा लंबा खींच लेंगे उतनी ज्यादा लेवी बनेगी , जल्दी करने से कम लेवी मिलेगी ”

ऋतु मैडम ” वो जो कम मेम्बरों वाली यूनियन है उसको तो शुरू में ऐसा लग रहा था कि सरकार उनके घर की है , जैसे चाहेंगे वैसे मनवा लेंगे , पर सरकार ने उनकी एक न सुनी ”

मिश्रा जी ” ये सब हैं एक ही जैसे लेवी तो उनको भी चाहिए ना , फर्क बस इतना है मेजोरिटी यूनियन पर आरोप लगाकर खुद बच निकलते हैं और फायदा तो भरपूर लेते ही हैं ”

सीमा मैडम ” सही कह रहे हैं सर, बिल्कुल राजनीति जैसा फंडा है एक दूसरे की टांग खिंचाई करते हैं पर सेटलमेंट की जल्दी एक को भी नहीं ”

कुमार ” ये सब अंदर अंदर मिलकर काम करते हैं पर मेम्बरों को लगता है कि इनकी फूट का फायदा IBA उठा रहा है ”

ऋतु ” हाँ , ना तो ये लोग मिलकर IBA से जल्दी मीटिंग तारीख मांगते हैं न ही कुछ कड़ा विरोध जताते हैं ”

सीमा ” पहले शोशल मीडिया नहीं था तो ये लोगों को पागल बना लेते थे आजकल तो शोशल मीडिया में इनके लिए थू थू हो रही है ”

“कुछ लोग तो कहते हैं यूनियन के मुख्य पदों पर पुराने लोग चिपके हुए हैं जिन्हें आजकल के बैंक की खबर ही नहीं , ऐसे लोग क्या मुद्दे रखेंगे” गणपत जी बोले

राहुल सिंह ” हर बार एक ही बात कि इस मुद्दे पर बात चल रही है , उस मुद्दे पर बात करके बताएंगे , अभी इतने दिनों में एक भी मुद्दे पर सहमति नहीं हो पाई , उसके बाबजूद कोई विरोध नहीं ”

गणपत जी ” सही बात है कम से कम इतना कर लें कि हर मीटिंग में कम से कम एक मुद्दा तो निपट सके या फिर उस पर कोई आगे की बात या पॉइंट तो इंगित करें ”

ऋतु ” हाँ हर बार हम बात करके बताएँगे, और तो और 1 % भी बढ़कर ऑफर नहीं आ रहा उसका कोई विरोध तक नहीं”

राहुल ” इसीलिए तो शोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि इस बार की मीटिंग का मेनू था शाही पनीर, नान , चिकन बिरयानी और स्वीट्स इत्यादि इत्यादि ”

गणपत जी ” जब हमने बैंक जॉइन की थी तब शाखा में भरपूर स्टाफ हुआ करता था कोई भी दिक्कत होने पर यूनियन वाले आ जाते थे , आज शाखाओं में स्टाफ पर डबल लोड दे रखा है पर यूनियन इतनी कमजोर हो गई हैं कि स्टाफ की मांग तक नहीं कर पातीं ”

शुक्ला जी ” अरे छोड़ो यार , सब सेट होगा पहले से , उन्हें पता है कितना लेट होने से किसको कितना फायदा होगा , सेटलमेंट तो जब वे चाहेंगे तब ही करेंगें, आप लोग चेक देखो और चलो ”

मिश्रा जी ” सही है अब फिर से तब बात होंगीं जब मीटिंग की डेट आएगी , और उसके बाद तब जब फिर से वही सर्कुलर आएगा कि किसी मुद्दे पर बात नहीं बनी , अगली मीटिंग जल्द होगी ”

हा हा हा

हा हा हा

चलो
चलो
फिर रिटर्न्स देने भी आना है । नमस्कार जी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *