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Boycott chinese product

Boycott chinese product

#Boycott_Chinese_Products
सुन कर लोग कहते हैं कि सबके घरों में चीन के प्रोडक्ट हैं फोन, टीवी अधिकतम चीज सब चीन की हैं तो उनको क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं?
अरे भाई जो चीज खरीद चुके हैं उसका तो कुछ नही हो सकता लेकिन आगे से ना खरीदने के लिए कहा जा रहा है।
जब सभी लोग मिल कर चीन के प्रोडक्ट को रिजेक्ट करेंगे तब मजबूरी में वो सब चीज यही अपने देश मे बननी शुरू होंगी।
“आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है”
पढ़े लिखे लोग भी इस तरह के कुतर्क करते हैं तो उनकी पढ़ाई और समझ पर हंसी भी आती है और दुख भी होता है।
इकॉनमी का रोना भी यही लोग रोते हैं, सरकार को कोसते हैं।
सरकार के “आत्मनिर्भर” अभियान का तरह तरह से मेमे बना कर , जोक बना कर मजाक बनाते हैं,
आत्मनिर्भर अभियान बहुत बड़ी बात है आज के वक़्त में। जिस इकॉनमी के गिरने का रोना लगाते हो यही आत्मनिर्भर अभियान देश की इकॉनमी को बचा सकता है।
जो ज्ञानी इकॉनमी पर ज्ञान देते हैं उनको तो पता ही होगा क्या मतलब है इस शब्द का और कितना जरूरी है आज के समय मे, अब इसके कुछ फायदे भी जान लें –
@ बेरोजगारी में कमी,
@ GDP में बढ़ोतरी,
@ आवश्यक सामान की घरेलू पूर्ति,
@ घरेलू पूर्ति से अधिक बना कर निर्यात कर विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़या जा सकता है,
@ वैश्विक मंदी जैसे खतरे का कम से कम प्रभाव
समस्या ये हैं कि हमारे देश मे मुफ्त की खाने की 70 साल की लत है जो कामचोरी करने में माहिर है और अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरे पर फोड़ने के लिए किसी न किसी को ढूंढते रहते हैं। अब जो विपक्ष है उसका तो समझ आता है कि उसका तो विरोध ही करना है हर बात पर, लेकिन समझ नही आता कि लोग क्यों नही समझ पा रहे।
विपक्ष ने कहा कि सबसे आसान तरीका की सबके खातों में पैसे डाल दो, बस सब खुश ? वोट अपने।
एयर हो भी क्यों नही, यही है सबसे पसन्दीदा आत्मनिर्भरता,  की हर महीने सरकार खाते में पैसा डाल दे बस, काम नही करना पड़े।
सरकार पैसा डाल दे, फिर उसी पैसे से रिचार्ज करवा के सरकार को कोस लो कि इकॉनमी गिर रही है, GDP फिर रहा है।