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कौन हैं भामाशाह क्यों कहते हैं दानवीर

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दानवीर भामाशाह ( Bhama Shah Jayanti )

आज उस महान दानवीर भामाशाह का जन्मदिवस है जिन्होने अपनी जमा पूँजी को धर्ममार्ग पर योद्धा महाराणा प्रताप को दान कर दिया था । जब जब राणा का नाम चर्चा में आएगा तब तब भामा का दान भी आएगा।

दान की चर्चा होते ही भामाशाह का नाम स्वयं ही मुँह पर आ जाता है। देश रक्षा के लिए महाराणा प्रताप के चरणों में अपनी सब जमा पूँजी अर्पित करने वाले दानवीर भामाशाह का जन्म अलवर (राजस्थान) में 28 जून, 1542 को हुआ था।

धन अर्पित करने वाले किसी भी दानदाता को दानवीर भामाशाह कहकर उसका स्मरण-वंदन किया जाता है। उनके लिए पंक्तियाँ कही गई हैं-

वह धन्य देश की माटी है, जिसमें भामा सा लाल पला। 

उस दानवीर की यश गाथा को, मेट सका क्या काल भला॥

भामाशाह बाल्यकाल से ही मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार थे। मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था और दानवीरता के लिए भामाशाह नाम इतिहास में अमर है।

उनके पिता श्री भारमल्ल तथा माता श्रीमती कर्पूरदेवी थीं। श्री भारमल्ल राणा साँगा के समय रणथम्भौर के किलेदार थे। अपने पिता की तरह भामाशाह भी राणा परिवार के लिए समर्पित थे।

एक समय ऐसा आया जब अकबर से लड़ते हुए राणा प्रताप को अपनी मातृभूमि का त्याग करना पड़ा। वे अपने परिवार सहित जंगलों में रह रहे थे। इस समय राणा के सम्मुख सबसे बड़ी समस्या धन की थी। उनके साथ जो विश्वस्त सैनिक थे, उन्हें भी काफी समय से वेतन नहीं मिला था।

भामाशाह के पास जो धन था उन्होंने यह सब राणा के चरणों में अर्पित कर दिया। हल्दी घाटी के युद्ध में पराजित महाराणा प्रताप के लिए उन्होंने अपनी निजी सम्पत्ति में इतना धन दान दिया था कि जिससे 25000 सैनिकों का बारह वर्ष तक निर्वाह हो सकता था।

दानवीर भामाशाह से प्राप्त धन के सहयोग से राणा प्रताप ने नयी सेना बनाकर अपने क्षेत्र को मुक्त करा लिया। भामाशाह जीवन भर राणा की सेवा में लगे रहे।

जब अकबर को पता लगी राणा प्रताप को नयी शक्ति मिल गयी तो अकबर ने क्रोधित होकर भामाशाह को पकड़ लाने को कहा। उसने भामाशाह को उसके दरबार में मनचाहा पद लेने और राणा प्रताप को छोड़ने को कहा पर दानवीर भामाशाह ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

महाराणा के देहान्त के बाद उन्होंने उनके पुत्र अमरसिंह के राजतिलक में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। इतना ही नहीं, जब उनका अन्त समय निकट आया, तो उन्होंने अपने पुत्र को आदेश दिया कि वह अमरसिंह के साथ सदा वैसा ही व्यवहार करे, जैसा उन्होंने राणा प्रताप के साथ किया है।

महाराणा मेवाड फाऊंडेशन की तरफ से दानवीर भामाशाह पुरस्कार राजस्थान मे मेरिट मे आने वाले छात्रो को दिया जाता है। उदयपुर, राजस्थान में राजाओं की समाधि स्थल के मध्य भामाशाह की समाधि बनी है।

भामाशाह योजना Bhamashah Yojna क्या है ? Click here

दानवीर भामाशाह सम्मान यह भारत में एक राज्यस्तरीय सम्मान हैं। दानवीर भामाशाह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रदान किया जाता हैं।

आज 28 जून को उस महान दानवीर के जन्मदिवस पर उनको बारम्बार नमन करते है