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सामने वाला चोर है ?

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हम चाहे अनपढ़ हों या पढ़े लिखे, चाहे अमीर हों या गरीब , चाहे ग्रामीण हों या शहरी । लेकिन हमारी जो सोच है वो लगभग एक जैसी ही है ।

मसलन हम कोई भी गलत काम होना देखते हैं या पाते हैं कि इसमें कुछ गलत है तो हमारी सभी इंद्रियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं और हमारा सारा ध्यान उस गलती या कमी की खोज में जुट जाता है ।

लेकिन एक जगह हम इसके बिल्कुल उलट होते हैं और वो तब जब कुछ गलती हम खुद कर रहे होते हैं लेकिन ध्यान सिर्फ सामने वाले के गलत काम पर केंद्रित होता है अपने गलत को हम ढकना शुरू कर देते हैं ।

चलिए कुछ आम जीवन के छोटे छोटे उदाहरण लेते हैं ।

मान लेते हैं कि हम एक ऐसा कार्य करते हैं जिसमे हमें लगातार वाहन का इस्तेमाल करना होता है यानि कि हमारी फील्ड जॉब है ऐसे में हम सड़कों पर काफी ड्राइविंग करते हैं ।

इसी दौरान कई बार हमें पुलिस वाहन चेकिंग करते हुए मिलती है , और हमें रोक लेती है हमारे ऊपर चालान होने जा रहा होता है तब हम कोशिश करते है कि सौ दो सौ देकर किसी तरह बच जाएं ।

और कई बार कुछ लालची लोगों की वजह से बच जाते हैं और फिर हम उस पुलिसकर्मी के गलत के बारे में सबको बता रहे होते हैं लेकिन यहाँ दरअसल ज्यादा गलत कौन होता है??

उसने पैसे लिए लेकिन दिए किसने ? वो कौन था जिसके बाइक पर तो हेलमेट लटका था पर सर पर लगाने में शान जा रही थी , या गाड़ी में सीटबेल्ट थी पर लगाना नहीं चाहते थे ।

सामने वाला चोर है तो कह दिया पर जिसको आप ये सब बता रहे थे उस व्यक्ति की आँखों मे झाँककर देखें वो बोल नहीं पा रहा पर मन ही मन कह रहा है कि साले असली चोर तो तू है जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है ।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है एजेंट को 500 अधिक दिए पर प्रोपर तरीके से लाइसेंस बनवाने का समय नही निकाल सकते फिर कहते हैं RTO अफसर गलत हैं । भाई ये ऑफर वाले पैसे देकर भ्रष्टाचार फैला कौन रहा है ?

हम ये तो समझते हैं कि रिश्वत भ्रष्टाचार है लेकिन हम देने से चूकते नहीं और नाम रख देते हैं सुविधा शुल्क । पर सिर्फ सामने वाला चोर है ।

चलिए रिश्वत से हटकर अब कुछ अलग क्षेत्र की बात करते हैं क्योंकि सरकारी कर्मी के रिश्वत का मुद्दा सबसे अधिक उठाने वाले लोग होते हैं व्यापारी लोग , ज्यादातर व्यापारियों को कहते सुना होगा अधिकारी चोर होते हैं और सिस्टम भ्रष्ट है ।

तो अब व्यापारी की तरफ रुख करते हैं , खुदरा व्यापारी में से आधी दुकानों के रजिस्ट्रेशन नहीं होते , जिनके रजिस्ट्रेशन हैं वे व्यापारी प्रॉपर बिलिंग नहीं करते अपनी सेल का कुछ प्रतिशत हिस्सा वे कागजी तौर पर दिखाते ही नहीं ।

मतलब जो माल खरीद रहे और बेच रहे उसमें से आधे का ही लेखा जोखा सेल टैक्स और इनकम टैक्स विभाग तक ये लोग पहुँचने देते है।

पर सिर्फ सामने वाला चोर है ।

एक शब्द प्रचलित है काला धन वो काला धन और कुछ नहीं वो कमाई है जिस पर आपने टैक्स नहीं दिया होता है । खाते पीते घर से चार चार गाड़ियां मेंटेन करके कई कर्मचारियों को सेलरी देने वाले ये व्यापारी ज्यादातर कार्य को नकद करना पसंद करते हैं ।

खाते से खाते का लेनदेन व्यापारियों और ठेकेदारों दोनों को ही पसंन्द नहीं वे सिर्फ उतना लेखा जोखा खाते से करना चाहते हैं जितने पर उन्हें टैक्स देना हो ।

पर साहब सिर्फ सामने वाला चोर है हम नहीं ।

किसी अधिकारी ने इनकी 10 बार की चोरी में से 1 बार पकड़ ली तो उसे रिश्वत खिलाकर खुले आम बोलते हैं कि अधिकारी भृष्ट हैं पर साहब क्या सिर्फ सामने वाला चोर है ?

चलिए आते हैं शिक्षा क्षेत्र में ये एक परोपकारी भावना हुआ करती थी लेकिन आज शुद्ध विजनिस है साहब ।

हम पहले बात करते हैं ऐसे स्कूल कॉलेजों की जहाँ शिक्षा कम ठेके ज्यादा लिए जाते हैं यानि कि 5000 में फर्स्ट डिवीजन , 3000 में सेकंड डिवीजन और 2000 में पास , 10000 में तो आने की जरूरत भी नहीं ।

ऐसे विद्यार्थी जो इनसे निकलते हैं वे भविष्य में क्या करेंगे ? क्या फायदा ऐसी शिखा का । पर साहब ये शिक्षा माफिया कहता है सामने वाला चोर है ।

कई स्कूल कॉलेज शिक्षकों को खाते में सैलरी देते हैं लगभग 20 हजार पर हकीकत में इसका कुछ हिस्सा नकद शिक्षकों से वापस ले लेते हैं पर साहब चोर सामने वाला है ।

यही फंडा कई निजी व्यवसायों का भी है कागजों में कर्मचारियों की सैलरी भरपूर है और हकीकत में आधी भी नहीं , निजी व्यवसाय वाले खून चूस लेते हैं कर्मचारियों का पर साहब चोर सामने वाला है ये नहीं ।

सुधार तभी संभव है जब हम सभी अपने अपने कार्य को पूर्ण ईमानदारी से करें , जब तक हम खुद गलत करते रहेंगे और सामने वाले को चोर कहते रहेंगे सुधार नहीं हो सकता , क्योंकि सामने वाला भी दूसरों से हमारे बारे में यही कह रहा होता है कि सामने वाला चोर है …..

राजनैतिक भ्रष्टाचार
पुलिस द्वारा भ्रष्टाचार
न्यायिक भ्रष्टाचार
विजनिस में भ्रष्टाचार
आमजन के भ्रष्टाचार
शाशन का प्रशाशन का भ्रष्टाचार

ज्यादातर लोगों के खुद के अंदर है चोर लेकिन आरोप सिर्फ सामने वाला चोर है ।

……..SK Sharma