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बैंकों का निजीकरण सही नहीं, विरोध शुरू

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बैंकों का निजीकरण सही नहीं, विरोध शुरू

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण खबर के आने के बाद से ही बैंक कर्मचारियों में सरकार के प्रति असंतुष्टि की भावना और विरोध जाग्रत हुआ है । उनका मानना है कि सर्वाजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण सही नहीं। यदि केवल चार बैंक रखने हैं तो बैंक विलय ही सही तरीका है।

बैंक कर्मचारियों के अनुसार जो सरकारी उपक्रम किसी जमाने में सरकार और देश की शान हुआ करते थे, वही इस नए दौर में सरकार को बोझ और बेकार लगने लगे हैं। हालाँकि आज तक सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं वे इन्ही बैंकों के द्वारा ही कारगर साबित हुई हैं ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा भारतीय मजदूर संघ भी अब मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतर आया है  विरोध में हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मोदी सरकार पर मजदूरों के हितों के खिलाफ आर्थिक नीति बनाने का आरोप लगाया है।

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बैंक कर्मियों ने सटीक उदाहरण दिया:

उन्होंने कहा जरा सोचिए कि एक पार्टी ने पहले चुनाव प्रचार में मेहनत की , फिर चुनाव लड़े , फिर जीतकर आए । और सरकार में आ गए । लेकिन फिर उनसे कहा जाए कि आपकी ये सरकार विपक्ष के अंडर में काम करेगी तो कैसा लगेगा ??

बिल्कुल वैसे ही बैंक कर्मियों ने पढ़ाई करके तैयारियां कीं, परीक्षा दीं, इंटरव्यू दिए , तब जाकर सार्वजनिक बैंक में नौकरी मिली और अब  सरकार कहती है कि अब आप प्राइवेट बैंक में काम करेंगे ।

एक युवा बैंक कर्मी के अनुसार उसकी शादी ही सरकारी नौकरी होने की वजह से फिक्स हुई है घर से ग़रीब है और जमीन जायदाद न होने से शादी नहीं हो रही थी। अब जब सारकारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में नौकरी मिली तो शादी फिक्स हुई है लेकिन अगर निजीकरण हुआ तो ससुराल वाले धोखा समझेंगे या शायद शादी ही न होने पाए।

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रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकतम चार कंपनियां

हाल ही में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रणनीतिक क्षेत्रों सहित उद्योग के सभी क्षेत्रों को निजी पूंजी के लिए खोलने की केंद्र की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी उल्लेख किया था कि रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकतम चार कंपनियां होंगी।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार नीतिआयोग ने चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का निजीकरण करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण पर चर्चा के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की व्यवस्था की गई है। पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, IOB, आदि कुछ नाम हैं जिनका निजीकरण किया जा सकता है।

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