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अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए लामबंद बैंक कर्मचारी

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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स, जिसमें नौ यूनियन शामिल हैं,  उसने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ दो दिन की हड़ताल बुलाई, देश में 15 और 16 मार्च को बैंक हड़ताल का एलान किया गया । लाखों बैंक कर्मी निजीकरण के विरोध में सड़कों पर उतरे ।

बैंकों के निजीकरण किए जाने को लेकर सरकार की नीतियों का विरोध किया गया । गौरतलब है इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के निजीकरण का एलान किया था।

देश के हर शहर में बैंक कर्मी सडकों पर विरोध प्रदर्शनों में ‘नरेंद्र मोदी हाय हाय’ से लेकर ‘चाय नहीं ये बैंक हैं’ तक के नारे गूंजते सुनाई दिए।

प्रदर्शन के दौरान कहा गया कि यह सरकार जनता की संपत्ति को कुछ औध्योगिक घरानों को बेचने की तैयारी में है जिसे बेचकर यह तो झोला उठाकर निकल लेंगे लेकिन इस देश के गरीब तबके का क्या होगा ? बहुत ही गुस्से में रहे बैंक कर्मी ‘ नरेन्द्र मोदी शोंचालय बेचो वही तुमने बनाए हैं बैंक नहीं ‘

अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए लामबंद दिखे कर्मचारी:

दो दिन की हड़ताल के दौरान सभी बैंक कर्मी एक नजर आए , सभी बैंक की शाखाएं बंद रहीं । प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारी अगली बार अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए लामबंद नजर आए । उनका कहना था कि यह सरकार तो अंग्रेजों से भी आगे है साफ़ झूठ बोलती है ये हमें अलग अलग करके हमारी बैंकों को दो दो करके बेच देंगे। फूट डालो और राज्य करो ही इनका मूल मन्त्र है ।

जो युवा आज सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे उनके लिए भविष्य में सरकारी नौकरी बचेंगी कहाँ से ? यह सरकार का दोगला पन है कि एक तरफ चुनाव प्रचार में सरकारी नौकरियों के सपने दिखा रहे हैं तो दूसरी और सरकारी कम्पनियों का निजीकरण कर सरकारी नौकरियों को ख़त्म किया जा रहा है।

विरोध कर्ताओ के अनुसार सरकार लगातार सरकारी कम्पनियों उपक्रम को बेचे जा रहे हैं जो कि गलत है । सिर्फ पार्टी फण्ड में चंदा मिलने को लेकर सरकारी संपत्ति औध्योगिक घरानों को नहीं बेचनी चाहिए।

11th (XI th) BANK BIPARTITE SETTLEMENT

Bank DA from February 2021 to April 2021